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विश्व मानव कल्याण ट्रस्ट

🌸#कन्यापूजन #किस #उम्र की #बच्चियों #का🌸

. #ॐ #नमः #चण्डिकाय


#एकवर्षा #न #कर्तव्या #कन्या #पूजाविधौ #नृप ।
#परमज्ञा #तु #भोगानां #गन्धादीनां #च #बालिका ।।
#अत #ऊर्ध्वं #न #कर्तव्या #सर्वकार्यविगर्हिता ।।
#देवीभागवत ३/२६/४०,४३

व्यासजी कहते है- नवरात्री में कन्यापूजन में एक वर्ष की अवस्था वाली कन्या नहीं लेना चाहिए क्योंकि वह गंध और खाद्य पदार्थों के स्वाद से बिल्कुल अनभिज्ञ रहती है । दस वर्ष के ऊपर की अवस्था वाली कन्या का पूजन नहीं करना चाहिए क्योंकि वह सभी कार्यों में निन्दनीय मानी जाती है ।"

. #जय #माँ #अम्बिकाभवानी
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۝ भगवान श्री बद्री विशाल नाथ मंदिर , ۝

भारतबर्ष में सनातन धर्म में सर्वोच्चय धर्म स्थान श्री बद्रीनारायण मंदिर को माना जाता है यह स्थान अलकनंदा नदी के किनारे उत्तराखंड राज्य के चमोली जिला में स्थित है। यह मंदिर भगवान विष्णु के रूप बद्रीनाथ को समर्पित है। यह हिन्दुओं के चार धाम में से एक धाम भी है। ऋषिकेष से यह २९४ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । ये पंच-बद्री में से एक बद्री हैं। उत्तराखंड में पंच बद्री, पंच केदार तथा पंच प्रयाग पौराणिक दृष्टि से तथा हिन्दू धर्म दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
• पौराणिक कथाओं में उल्लिखित सांप(साँपों का जोड़ा)
• शेषनाग की कथित छाप वाला एक शिलाखंड – शेषनेत्र
• चरणपादुका- जिसके बारे में कहा जाता है कि यह भगवान विष्णु के पैरों के निशान हैं;(यहीं भगवान विष्णु ने बालरूप में अवतरण किया था। )
• बद्रीनाथ से नज़र आने वाला बर्फ़ से ढंका ऊँचा शिखर नीलकंठ, जो 'गढ़वाल क्वीन' के नाम से जाना जाता है।
• माता मूर्ति मंदिर:- जिन्हें बद्रीनाथ भगवान जी की माता के रूप में पूजा जाता है।
• माणा गाँव: इसे भारत का अंतिम गाँव भी कहा जाता है।
• वेद व्यास गुफा,गणेश गुफा: यहीं वेदों और उपनिषदों का व्याख्यान और लेखन हुआ था ।

!! बिशेष श्राद्ध जिससे पितर मुक्ति !!
ब्रह्म कपाल :- यहाँ पितर की मोक्ष हेतु ,ब्रह्मकपाली श्राद्ध करने से सभी सात पुस्त के पितरो का मोक्ष हो जाता है,और पितर दोष से व्यक्ति मुक्त हो जाता है ।

🔔 *श्रीबद्री बिशाल जी की आरती* 🔔

पवन मंद सुगन्ध शीतल,हेम मंदिर शोभितम,
निकट गंगा बहत निर्मल बद्रीनाथ बिशब्भरम ।
शेष सुमिरन करत निसदिन धरत ध्यान महेश्वरम,
वेद ब्रह्मा करत स्तुति श्री बद्रीनाथ बिश्वभरम ।
शक्ति गौरी गणेश शारद नारद मुनि उच्चारनम,
योग ध्यान अपार लीला श्री बद्रीनाथ बिश्वभरम ।
इंद्र,चन्द्र,कुवेर,दिनकर धूप-दीप प्रकाशितम,
सिद्ध मुनिजन करत जय जय श्रीबद्रीनाथ बिश्वभरम ।
यक्ष,किन्नर करत कौतुक ज्ञान गन्धर्व प्रकाशितम ,
श्रीलक्ष्मी-कमला चवर डोले श्रीबद्रीनाथ बिश्वभरम ।
कैलाश में एक देव निरंजन शैल शिखर महेश्वरम ,
राजा युधिष्ठिर करत स्तुति श्रीबद्रीनाथ बिश्वभरम ।
श्रीबद्री जी की पंचरत्न पढ़त पाप विनाशनम ,
कोटि तीर्थ प्रभूत पुण्यम प्राप्यते फलदायकम ।।

!! पँ०हिमांशु मिश्र। !!
. ७७३९७९२५२०
. www.ambikabhawani.in
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💐 #शास्त्रनुसार #सियार #सिंधी का #महत्ब 💐

प्रिय मित्रों,
#सियार सिंघी बहुत ही #चमत्कारी होती है , इसे घर में रखने से #सकारात्मकउर्जा का अनुभव होता है । इसमें #वशीकरण की #अद्भुत #शक्ति होती है , यदि इसे सिद्ध कर लिया जाए तो यह शक्ति कई गुना बढ़ जाती है ! इसके द्वारा आप किसी से भी अपना #मनोवांछित काम करवा सकते है । इसे सिद्ध किया जाए तो इसका #चमत्कार बड़ी जल्दी नज़र आता है ।⚡

*!! #सिद्ध #सियार #सिंगी के #कुछ #कार्य/#लाभ :---!!*

1. इच्छाये अपने आप पूरी हो जाती है।🌷🌷

2. सियार सिंघी व्यापार या नौकरी में उन्नती में बहुत लाभदायक है। 💐 💐

3. कई बार ईर्ष्या के कारण कुछ लोग तंत्र प्रयोग कर देते हैं। जिससे दूकान में ग्राहक नहीं आते यां कार्य सफल नहीं होते. ऐसे में सियार सिंघी के साथ हत्थाजोड़ी जरूर रखे इन परस्थितियों में इनका प्रयोग राम बाण की तरह है।💐💐💐💐

4. जिस व्यक्ति के पास यह होती है l उसे किसी बात कि कमी नहीं होती l💥💥

5. इसे घर में रखने से पॉजिटिव एनर्जी( सकारात्मक उर्जा) का अनुभव होता है ।💐💐

6. यदि इसे हत्था जोड़ी के साथ रखा जाए तो यह बहुत
शक्तिशाली हो जाती है lऔर धन-सम्पति, वशीकरण, शत्रु शमन मे व्यक्ति सशक्त हो जाता है💐💐

7. मारकेश दशा (कुंडली में स्थित मृत्यु कारक ग्रह की दशा, जिस दौरान मृत्यु की संभावना सबसे अधिक होती है) चल रही हो तो सियार सिंगी सदैव पास में रखे l
💐💐
8. अगर प्रेमी यां प्रेमिका का मन बदल गया हो , कोई अधिकारी आपके विरोध में कार्य कर रहा हो,अथवा आपके परिवार में कोई सदस्य गलत रास्ते पर जा रहा हो तो सियार सिंघी से वशीकरण प्रयोग करके उसका मन बदला जा सकता है । यदि पति- पत्नी में अगर कलह रहती हो तो वशीकरण से आपस में विवाद ख़तम किये जा सकते हैं । इस प्रयोग को आजमाने के लिए नहीं करना चाहिए. जब कोई और चारा ना बचे तब इसको प्रयोग करें ।💐💐

9. क्या आपको हमेशा अजीब सा डर सताता रहता है। कभी अपने दुश्मनों का तो कभी किसी अंजान शक्ति का। 💐💐

. !! पँ0 हिमांशु मिश्र !!
. राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित " समाज सेवी,
. 🔔 मो0 न0 -- 7739792520
. www.ambikabhawani.in

. " शारीरिक ऊर्जा "
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. 💐 !! #सावनमास में #रुद्राभिषेक !! 💐

🚩#रुद्राभिषेक कैसे और किन-किन चीजों से किया जाता है,इसकी महिमा शिवपुराण में उल्लेखित है ,उसका सविस्तार विवरण प्रस्तुत कर रहा हू और आप से अनुरोध है की आप इसी के अनुरूप #रुद्राअष्टधायी के #आठअध्याय #रचितमन्त्रों से रुद्राभिषेक कराये तो आपको पूर्ण लाभ मिलेगा!!

. !!! #श्लोक. !!

जलेन वृष्टिमाप्नोति व्याधिशांत्यै कुशोदकै |

दध्ना च पशुकामाय श्रिया इक्षुरसेन वै |

मध्वाज्येन धनार्थी स्यान्मुमुक्षुस्तीर्थवारिणा |

पुत्रार्थी पुत्रमाप्नोति पयसा चाभिषेचनात |

बन्ध्या वा काकबंध्या वा मृतवत्सा यांगना |

जवरप्रकोपशांत्यर्थम् जलधारा शिवप्रिया |

घृतधारा शिवे कार्या यावन्मन्त्रसहस्त्रकम् |

तदा वंशस्यविस्तारो जायते नात्र संशयः |

प्रमेह रोग शांत्यर्थम् प्राप्नुयात मान्सेप्सितम |

केवलं दुग्धधारा च वदा कार्या विशेषतः |

शर्करा मिश्रिता तत्र यदा बुद्धिर्जडा भवेत् |

श्रेष्ठा बुद्धिर्भवेत्तस्य कृपया शङ्करस्य च |

सार्षपेनैव तैलेन शत्रुनाशो भवेदिह |

पापक्षयार्थी मधुना निर्व्याधिः सर्पिषा तथा |

जीवनार्थी तू पयसा श्रीकामीक्षुरसेन वै |

पुत्रार्थी शर्करायास्तु रसेनार्चेतिछवं तथा. |

महलिंगाभिषेकेन सुप्रीतः शंकरो मुदा |

कुर्याद्विधानं रुद्राणां यजुर्वेद्विनिर्मितम् !

. !! #अर्थात. !!

#जल से रुद्राभिषेक करने पर — #वृष्टि होती है* |

#कुशा जल से अभिषेक करने पर — #रोग, #दुःख से छुटकारा मिलती है।

#दही से अभिषेक करने पर — #पशु, #भवन तथा #वाहन की प्राप्ति होती है*

#गन्ने के रस से अभिषेक करने पर — #लक्ष्मीप्राप्ति |

#मधु युक्त जल से अभिषेक करने पर — #धनवृद्धि के लिए |

#तीर्थजल से अभिषेकक करने पर — #मोक्ष की प्राप्ति होती है |

*#इत्र मिले जल से अभिषेक करने से — #बीमारी नष्ट होती है |

#दूध् से अभिषेककरने से — #पुत्रप्राप्ति,#प्रमेहरोग की #शान्ति तथा #मनोकामनाएं पूर्ण होती है !

#गंगाजल से अभिषेक करने से — #ज्वर ठीक हो जाता है !

#दूध् शर्करा मिश्रित अभिषेक करने से — #सद्बुद्धि प्राप्ति हेतू !

#घी से अभिषेक करने से — #वंशविस्तार होती है!

#सरसों के तेल से अभिषेक करने से — #रोग तथा #शत्रु का नाश होता है

#शुद्धशहद से रुद्राभिषेक करने से —- #पापक्षय होता है !

इस प्रकार शिव के रूद्र रूप के पूजन और अभिषेक करने से जाने-अनजाने होने वाले पापाचरण से भक्तों को शीघ्र ही छुटकारा मिल जाता है और साधक में शिवत्व रूप सत्यं शिवम सुन्दरम् का उदय हो जाता है उसके बाद शिव के शुभाशीर्वाद सेसमृद्धि, धन-धान्य, विद्या और संतान की प्राप्ति के साथ-साथ सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाते हैं।

. *!! #पँ हिमांशु मिश्र। !!*
. *!! ७७३९७९२५२० !!*
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. ॥ #सर्वगायत्रीमन्त्राः ॥

. शास्त्रानुसार विभिन्न प्रकार के
. गायत्री मन्त्रों का संकलन

1 सूर्य ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

2 ॐ आदित्याय विद्महे सहस्रकिरणाय धीमहि तन्नो भानुः प्रचोदयात् ॥

3 ॐ प्रभाकराय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात् ॥

4 ॐ अश्वध्वजाय विद्महे पाशहस्ताय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात् ॥

5 ॐ भास्कराय विद्महे महद्द्युतिकराय धीमहि तन्न आदित्यः प्रचोदयात् ॥

6 ॐ आदित्याय विद्महे सहस्रकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात् ॥

7 ॐ भास्कराय विद्महे महातेजाय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात् ॥

8 ॐ भास्कराय विद्महे महाद्द्युतिकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात् ॥

9 चन्द्र ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे महाकालाय धीमहि तन्नश्चन्द्रः प्रचोदयात् ॥

10 ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृतत्वाय धीमहि तन्नश्चन्द्रः प्रचोदयात् ॥

11 ॐ निशाकराय विद्महे कलानाथाय धीमहि तन्नः सोमः प्रचोदयात् ॥

12 अङ्गारक, भौम, मङ्गल, कुज ॐ वीरध्वजाय विद्महे विघ्नहस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात् ॥

13 ॐ अङ्गारकाय विद्महे भूमिपालाय धीमहि तन्नः कुजः प्रचोदयात् ॥

14 ॐ चित्रिपुत्राय विद्महे लोहिताङ्गाय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात् ॥

15 ॐ अङ्गारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात् ॥

16 बुध ॐ गजध्वजाय विद्महे सुखहस्ताय धीमहि तन्नो बुधः प्रचोदयात् ॥

17 ॐ चन्द्रपुत्राय विद्महे रोहिणी प्रियाय धीमहि तन्नो बुधः
प्रचोदयात् ॥

18 ॐ सौम्यरूपाय विद्महे वाणेशाय धीमहि तन्नो बुधः प्रचोदयात् ॥

19 गुरु ॐ वृषभध्वजाय विद्महे क्रुनिहस्ताय धीमहि तन्नो गुरुः प्रचोदयात् ॥

20 ॐ सुराचार्याय विद्महे सुरश्रेष्ठाय धीमहि तन्नो गुरुः प्रचोदयात् ॥

21 शुक्र ॐ अश्वध्वजाय विद्महे धनुर्हस्ताय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात् ॥

22 ॐ रजदाभाय विद्महे भृगुसुताय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात् ॥

23 ॐ भृगुसुताय विद्महे दिव्यदेहाय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात् ॥

24 शनीश्वर, शनैश्चर, शनी ॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि तन्नो मन्दः प्रचोदयात् ॥

25 ॐ शनैश्चराय विद्महे सूर्यपुत्राय धीमहि तन्नो मन्दः प्रचोदयात् ॥

26 ॐ सूर्यपुत्राय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि तन्नः सौरिः प्रचोदयात् ॥

27 राहु ॐ नाकध्वजाय विद्महे पद्महस्ताय धीमहि तन्नो राहुः प्रचोदयात् ॥

28 ॐ शिरोरूपाय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नो राहुः प्रचोदयात् ॥

29 केतु ॐ अश्वध्वजाय विद्महे शूलहस्ताय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात् ॥

30 ॐ चित्रवर्णाय विद्महे सर्परूपाय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात् ॥

31 ॐ गदाहस्ताय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात् ॥

32 पृथ्वी ॐ पृथ्वी देव्यै विद्महे सहस्रमर्त्यै च धीमहि तन्नः पृथ्वी प्रचोदयात् ॥

33 ब्रह्मा ॐ चतुर्मुखाय विद्महे हंसारूढाय धीमहि तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात् ॥

34 ॐ वेदात्मनाय विद्महे हिरण्यगर्भाय धीमहि तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात् ॥

35 ॐ चतुर्मुखाय विद्महे कमण्डलुधराय धीमहि तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात् ॥

36 ॐ परमेश्वराय विद्महे परमतत्त्वाय धीमहि तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात् ॥

37 विष्णु ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥

38 नारायण ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥

39 वेङ्कटेश्वर ॐ निरञ्जनाय विद्महे निरपाशाय (?) धीमहि तन्नः श्रीनिवासः प्रचोदयात् ॥

40 राम ॐ रघुवंश्याय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात् ॥

41 ॐ दाशरथाय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात् ॥

42 ॐ भरताग्रजाय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात् ॥

43 ॐ भरताग्रजाय विद्महे रघुनन्दनाय धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात् ॥

44 कृष्ण ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नः कृष्णः प्रचोदयात् ॥

45 ॐ दामोदराय विद्महे रुक्मिणीवल्लभाय धीमहि तन्नः कृष्णः प्रचोदयात् ॥

46 ॐ गोविन्दाय विद्महे गोपीवल्लभाय धीमहि तन्नः कृष्णः प्रचोदयात् ।

47 गोपाल ॐ गोपालाय विद्महे गोपीजनवल्लभाय धीमहि तन्नो गोपालः प्रचोदयात् ॥

48 पाण्डुरङ्ग ॐ भक्तवरदाय विद्महे पाण्डुरङ्गाय धीमहि तन्नः कृष्णः प्रचोदयात् ॥

49 नृसिंह ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्णदंष्ट्राय धीमहि तन्नो नारसिꣳहः प्रचोदयात् ॥

50 ॐ नृसिंहाय विद्महे वज्रनखाय धीमहि तन्नः सिंहः प्रचोदयात् ॥

51 परशुराम ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नः परशुरामः प्रचोदयात् ॥

52 इन्द्र ॐ सहस्रनेत्राय विद्महे वज्रहस्ताय धीमहि तन्न इन्द्रः प्रचोदयात् ॥

53 हनुमान ॐ आञ्जनेयाय विद्महे महाबलाय धीमहि तन्नो हनूमान् प्रचोदयात् ॥

54 ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो हनूमान् प्रचोदयात् ॥

55 मारुती ॐ मरुत्पुत्राय विद्महे आञ्जनेयाय धीमहि तन्नो मारुतिः प्रचोदयात् ॥

56 दुर्गा ॐ कात्यायनाय विद्महे कन्यकुमारी च धीमहि तन्नो दुर्गा प्रचोदयात् ॥

57 ॐ महाशूलिन्यै विद्महे महादुर्गायै धीमहि तन्नो भगवती प्रचोदयात् ॥

58 ॐ गिरिजायै च विद्महे शिवप्रियायै च धीमहि तन्नो दुर्गा प्रचोदयात् ॥

59 शक्ति ॐ सर्वसंमोहिन्यै विद्महे विश्वजनन्यै च धीमहि तन्नः शक्तिः प्रचोदयात् ॥

60 काली ॐ कालिकायै च विद्महे श्मशानवासिन्यै च धीमहि तन्न अघोरा प्रचोदयात् ॥

61 ॐ आद्यायै च विद्महे परमेश्वर्यै च धीमहि तन्नः कालीः प्रचोदयात् ॥

62 देवी ॐ महाशूलिन्यै च विद्महे महादुर्गायै धीमहि तन्नो भगवती प्रचोदयात् ॥

63 ॐ वाग्देव्यै च विद्महे कामराज्ञै च धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥

64 गौरी ॐ सुभगायै च विद्महे काममालिन्यै च धीमहि तन्नो गौरी प्रचोदयात् ॥

65 लक्ष्मी ॐ महालक्ष्मी च विद्महे विष्णुपत्नीश्च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ॥

66 ॐ महादेव्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ॥

67 सरस्वती ॐ वाग्देव्यै च विद्महे विरिञ्चिपत्न्यै च धीमहि तन्नो वाणी प्रचोदयात् ॥

68 सीता ॐ जनकनन्दिन्यै विद्महे भूमिजायै च धीमहि तन्नः सीता प्रचोदयात् ॥

69 राधा ॐ वृषभानुजायै विद्महे कृष्णप्रियायै
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